क्या गाड़ी है


 झंडू गाने – 3

कल हमने जग्गू दा के झंडू गाने को सुना था, और इत्तेफाक़ की बात, आज भी जो गाना याद आया वो जग्गू दा का ही है और इसे भी अपनी कलम से बाहर फेंका है “आनंद बक्षी” साहब ने। 

अब कहने को तो इन्हें झंडू गाने कह दिया जाता है लेकिन इनके पीछे भी गहरा दर्शन छुपा होता है। अलंकारों का तो जितना भर-भर कर उपयोग इन गीतों में होता है उतना आपके अच्छे कहे जाने वाले गीतों में कभी नहीं होता। जैसे “प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है। हर खुशी से हर ग़म से बेगाना होता है”। 

अब ये क्या बात हुई? सीधी-सीधी दो पंक्तियाँ हैं, कह दीं। न कोई उपमा, न अलंकार। 

अब हमारा आज का गाना ही आप पढ़ेंगे तो मन ब्रूम ब्रूम हो जाएगा। ब्रूम-ब्रूम इसलिए कि इस गाने में गाड़ी की उपमा को नायिका के साथ बड़ी खूबसूरती से जोड़ा गया है। मुखड़ा पढ़िये –

“क्या गाड़ी है, क्या नंबर है

क्या बॉडी है, क्या बम्पर है

आगे से देखो, पीछे से देखो

ऊपर से देखो, नीचे से देखो

कहीं से देखो जी

हाय क्या बात है”

नायक एक मैकेनिक है और इस गाड़ी की मोहब्बत में पड़ गया है। पर गौर करने वाली बात ये है कि अगर ये गाड़ी किसी आदमी की होती तो ये मैकेनिक फटाफट काम कर के उसके बटुए को साफ़ कर देता, ढेर सारी समस्याएँ बताकर। पर लड़की है, और वो भी संगीता बिजलानी है, सुर्ख़ लाल कपड़े पहने हुए। 

ख़ैर, वैसे आदमी को बचपन से गाड़ियों से लगाव होता है, हर बच्चा कार को देखकर ललचाता है। तो यहाँ बक्शी साहब ने गाड़ी और लड़की का अद्भुत मेल बैठाया है। गाड़ी तो बढ़िया है ही, उसे चलाने वाली लड़की भी बढ़िया है, तो ऐसी उपमाएँ दी हैं जो दोनों को संतुष्ट करती हैं। इसके लिए उन्होने कविता में एक बार फिर अँग्रेजी का सहारा लिया है जैसे “ब्रेक मारती है, फरंट मारती है” जैसे कालजयी गाने में लिया था। गाड़ी के साथ बॉडी और नंबर के साथ बम्पर का बहुत ही सुंदर तुक मिलाया है। आप इसे सुनकर कभी गाड़ी की कल्पना करते है, कभी बॉडी की...मेरा मतलब है लड़की की। बक्शी साहब को यूं ही महान नहीं कहा जाता। 

इस गाने में एक बार फिर जग्गू दादा को नचाने की असफल कोशिश की गई है। जाने कौन सा गैरेज है कि ढेर सारे मैकेनिक हैं और सभी इस एक लड़की के पीछे गाना गाने लगते हैं। 

इस गीत को अमित कुमार और अल्का यागनिक ने गाया था, संगीतबद्ध लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल ने किया था और इस फ़िल्म का नाम है “लक्ष्मणरेखा” जिसे प्राण साहब के बेटे सुनील सिकंद ने बनाया था। मेरे पास इसकी कैसेट थी, ए साइड में “निश्चय” और बी साइड में “लक्ष्मणरेखा”। मैंने बचपन में बहुत सुना है ये गाना और राज़ की बात ये है कि मुझे अच्छा लगता था 😊

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