बारह महीने लाइन मारी
झंडू गाने – 5
“एहसान तेरा होगा मुझ पर, दिल चाहता है वो कहने दो
मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई है मुझे पलकों की छांव में रहने दो”
अरे नहीं नहीं, आप गलत समझ रहे हैं, इस तरह के useless गाने हमारी सिरीज़ का हिस्सा नहीं हैं। ये गाना तो इसलिए याद दिला रहा हूँ कि किसी जमाने में इस तरह unrealistic तरीके से प्यार का इज़हार किया जाता था। अब अपने देश की 85% आबादी इस तरह की भाषा समझती ही नहीं है तो लड़की क्या खाक समझेगी और खाक उत्तर देगी। उल्टे ऊटपटाँग बातें करने का आरोप लगा कर ख़ारिज़ कर देगी। ये बात गीतकारों को बहुत देर से समझ आई। अब हम उसी danger zone में प्रवेश करने जा रहे हैं जब ये बात सबको समझ आने लगी थी और नाई की, पान की दुकानों पर होने वाली बातें साहित्यिक कृति का दर्जा पाने लगी थी और आम आदमी भी इस साहित्यिक लहर का अपने आप एक हिस्सा बन गया था। जिससे आमजन में आनंद की लहर थी। अब ज़बान को लक़वा मार देने वाले गीतों की बजाय अपने से लगने वाले शब्दों के गाने बन रहे थे जिन्हें लोटा लेकर खेत में साथ ले जाया जा सकता था। सावन कुमार ने इसी तरह का एक कालजयी गीत अपनी फिल्म “सौतन की बेटी” में रचा, जो उनकी ही एक सुपर हिट फ़िल्म “सौतन” की सफलता की जुगाली की कोशिश थी। इस गीत को बड़े ही उल्लास के साथ गाया था हमारे किशोर दा ने।
“ऐ मिस, 35, 35, 36”
इस लाइन से गाना शुरू होता है। बताइये, पहली ही लाइन में बेइज्जती? आदर्श फ़िगर माना जाता है 36-24-36, इस आदमी ने पहली ही लाइन में लड़की (?) को rectangle शेप का बता दिया।
ख़ैर, इसके बाद वो अपना रोना शुरू करता है, और उसका साथ थकेले डांस में दे रहे हैं 12 नल्ले जो पीठ पर महीनों के नाम लिखे हुए हैं।
“बारह महीने लाइन मारी, फ़िर भी लगा ना नंबर
जनवरी में शुरू किया था, आ गया दिसम्बर
मेरा फ़िर भी लगा न नंबर”
आप देखिये कालजयी गीत रचने के लिए उसमें अंग्रेज़ी शब्दों का उपयोग निहायत ही ज़रूरी है ये हमने पिछले 5 गानों में लगातार देखा है। अब इस गीत में गीतकार ने “लाइन मारी” फ्रेज का उपयोग किया है जो लड़कों के बीच रोज़मर्रा में कई बार use होता है। कितना अपना सा, आत्मीय शब्द है जिससे हर लड़का तुरंत जाकर जुड़ जाता है। हालाँकि इस “लाइन मारी” फ्रेज पर अब तक साहित्यकारों ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है, इसकी व्याख्या कहीं नहीं मिलती कि आख़िर वो लाइन कौन सी है जिसे मारा जाता है? क्या है इसके गूढ़ अर्थ?
ख़ैर, ये 50 साल का हीरो (जीतेंद्र), 45 साल की हीरोइन (रेखा) को अपना बहुत ही थकेला डांस और बेहद ढीले साथियों के साथ पटाने की कोशिश कर रहा है। हीरोइन के साथ भी 4-5 लड़कियाँ एंवेई टहल रही हैं। एक बात पर मुझे घोर आपत्ति है, अप्रैल की टी शर्ट गंजे लड़के को क्यों पहनाई? मेरी भावनाएँ आहत हो गईं हैं, क्योंकि मेरा जन्मदिन उसी महीने में आता है। पूरे गाने में जनवरी से लेकर दिसम्बर तक की घटनाओं का भावभीना विवरण है जिसे सुनकर, अगर ये महीने इंसान होते, तो आत्महत्या कर लेते।
मैं आपसे अपील करता हूँ कि इस गाने को लड़कों का anthom बना दिया जाये और आप सब एक बार पूरी श्रद्धा के साथ सुनें।
इसके संगीतकार कोई वेदपाल हैं, जो इसी गीत को बनाने के लिए जन्में थे, इसके बाद उनका भी कोई नंबर नहीं लग पाया।
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