किस्सिक - झंडुत्व का सिरमौर
वैसे तो मेरा मानना है कि झंडू गाने पुराने वक़्त में ढूँढना ही श्रेयस्कर है क्योंकि आज का जो समय है वो पूरा समय ही झंडू है, यहाँ हर गीत झंडू गीत है। पर जब मैंने ये गाना सुना तो मेरे शरीर में जितने फ्यूज़ भगवान ने इन्स्टाल किए थे सब उड़ गए। इस गाने ने झंडूत्व की सारी सीमाएँ तोड़ दीं। ऐसे महान गीत को अगर अपनी सिरीज़ में स्थान नहीं दिया तो चित्रगुप्त सारे अच्छे कर्मों के बावजूद स्वर्ग में एंट्री बैन कर देंगे। तो आज हम इस महानतम गीत की बात करेंगे।
ये फ़िल्म पुष्पा 2 का गीत है जिसके हीरो आलू अर्जुन हैं। पुष्पा 1 में आप “ऊ अंते आं आं” और “सामे सामे” जैसे कालजयी गीत सुन चुके हैं। और उस छोटे डोज़ को आप झेल गए इसीलिए इस बात पूरा इंजेक्शन भरकर आपको ठूँसा जा रहा है। तो ये गीत दर असल फोटो खींचने-खिंचवाने के बारे में है, और बहुत ही प्रेक्टिकल बातें हो रही हैं इसमें। लेकिन फोटो की बात किस से शुरू होती है –
“किस किस किसिक”
और फिर अचानक गाने में ट्विस्ट आ जाता है, और यही बात इस गीत को कालजयी बना जाती है, आज तक कहानियों में ट्विस्ट आया करता था, पर ये पहली बार है कि गाने में ट्विस्ट आया है। किस की बात करते करते अचानक ये फोटो लेने की बातें करने लगता है –
“लइलो लइलो लइलो ताऊ की फोटो ले लो
लाला के संग ले लो, साला के संग लेलों
ससुरे के संग ले लो, सास के संग ले लो
अपनों के संग परायों के संग खासम खास के संग लेलों
इसकी फोटो उसकी फोटो एल्बम में टाँक देना”
देखिये तुकबंदी करके कठिन शब्दों को मिक्सी में फेंट कर घोल देने से गीत अच्छे नहीं बनते, गीत आम ज़बान में होने चाहिए और आम ज़बान याने? जैसे हम बातचीत करते हैं। जैसे आप फोटो के बारे में बात कर रहे हैं तो उसी के पीछे ढमाढम, ताबड़तोड़ कुछ बजा दिया जाये तो कैसा रहे? यही होगा रियलिस्टिक गाना। इसमें लड़की कह रही है कि तुम सबके साथ फोटो ले लो और एल्बम में लगा दो, मुझे फड़क नहीं पड़ता। इसके बाद वो महत्वपूर्ण बात कहती है जिसमें धमकी भी छुपी हुई है –
“मेरी फोटो छुपा के सबसे लॉकर में रख देना
जो अगर किसी की नज़र पड़ी तो सुन
थप्पड़ मारूँगी साला थप्पड़ मारूँगी
थप थप थप्पड़ मारूँगी”
इंटरनेट के जमाने में लड़की डरी हुई है, वो चाहती है कि उसकी फोटो लॉकर में छुपा कर रख दी जाये ताकि कोई कुछ कर न दे फोटो के साथ। वो बहुत ही काव्यात्मक तरीके से साइबर क्राइम को उजागर कर रही है। और प्यारी सी धमकी बार-बार दे रही है कि वो थप्पड़ मारेगी। अब हो सकता है उसका हाथ ढाई किलो का हो तो थप्पड़ बड़ा जोरदार पड़ता हो, वरना जिस फ़िल्म के बीचोबीच खड़ी होकर वो ये धमकी दे रही है वहाँ तो गंडासे चलते हैं तो थप्पड़ की औकात ही क्या। इस कांट्रास्ट में ये नायिका बहुत मासूम लगती है। दूसरी बात, वो “साला” भी कह रही है, हालाँकि लड़की का साला हो नहीं सकता, पर वो फेमिनिस्ट ही क्या जो हर स्थापित मान्यता को चुनौती न दे?
“मेरे संग फोटो खिंचवाना, इधर उधर ना हाथ लगाना
थप्पड़ मारूँगी किस्सिक थप्पड़ मारूँगी किस्सिक”
दर असल ये गीत फोटो खिंचवाने का “नियम एवं शर्तें” वाला ड़ोक्यूमेंट है जिस पर फलाने को साइन करने हैं। बस ये डॉकयुमेंट बड़ा ही साहित्यिक है इसमें थप्पड़ के साथ किस्सिक की ध्वनि को मिलाकर मनभावन बनाया गया है। मुझे भी नहीं पता इस किसिक के बीच-बीच में क्या मायने हैं पर कौन ऐसा शख़्स है इस धरती पर जिसे टर्म्स एंड कंडिशन्स वाला पूरा डॉकयुमेंट समझ आ गया हो?
“शरीफ़ों वाली शक्ल बनाना, दिल में जो है चेहरे पर ना लाना
थप्पड़ मारूँगी किस्सिक थप्पड़ मारूँगी”
वो जो पहले मीटर वाली बकवास करते थे कवि-शायर-गीतकार वो बस अपनी हीन भावना को छुपाने के लिए करते थे, इस गीत ने स्थापित किया है कि मीटर-वीटर कुछ नहीं होता, जो ऐसी बकवास करे तो थप्पड़ मारूँगी किस्सिक थप्पड़ मारूँगी। आप देखिये हर लाइन की साइज़ अलग है। ये एक अलग ही कला है और कलाकार को यहाँ तक पहुँचने के लिये कला को भी बाइपास करना पड़ता है, बड़ा मुश्किल काम है। देखिये इसकी एक-एक पंक्ति की अगर मैं सही तरीके से व्याख्या करने बैठूँ तो एक महाकाव्य लिख मारूँगा, तो आप पहले अगले दो अंतरे पढ़िये फिर संक्षेप में थोड़ा बहुत आपके गले से उतारूँगा, आप ज़्यादा समझ लेना।
“सिंगल फोटो हो ले लो, मिंगल फोटो हो ले लो
ग्रुप में फोटो लेना हो, कोई हर्ज़ नहीं ले लो
लेकिन फोटो जो आम किया, लोगों में बदनाम किया, थप्पड़ मारूँगी साला थप्पड़ मारूँगी
किसी पोज़ में फोटो ले लो, एक्सपोज़ जो किया तो सुन लो थप्पड़ मारूँगी किस्सिक थप्पड़ मारूँगी"
मतलब किसी भी प्रकार का फोटो लेने भर की छूट है पर उसको किसी को दिखाया तो तेरी @##$!@
“किसी भी एंगल में हो ले लो, जो बैड एंगल से देखा तो
थप्पड़ मारूँगी किस्सिक
रह अपनी औकात पर, रख काबू जज़्बात पर" (यहाँ कवि भावनाओं में बहकर मीटर के चक्कर में पड़ गया, बस यही दो पंक्तियाँ इस गीत में इसीलिए खराब लिखी गई हैं, बाकी सारी पंक्तियों की साइज़ अलग-अलग हैं)
"लेकिन मोर्फिंग करके प्रिंट किया, अपलोड किया और लिंक दिया, थप्पड़ मारूँगी साला थप्पड़ मारूँगी"
अंत में ये गीत एक सामाजिक संदेश बन जाता है। आजकल फोटो को मोर्फ़ करके अपलोड करने की घटनाएँ बढ़ रही हैं और इसीलिए लड़की ये संदेश दे रही है, हालाँकि जिन वस्त्रों में वो नाच रही है, उनमें फोटो ले लिया तो मोर्फ करने की मेहनत लगेगी नहीं, पर फिर भी बताना हमारा फर्ज़ है सोचकर बता रही है।
अंत में उसकी कैसेट थप्पड़ मारूँगी, किस्सिक और साला पर उलझ जाती है और वहीं फँसे-फँसे गाना खत्म होता है और हमें वो फीलिंग दे जाता है जो उन लोगों को होती होगी जो किसी यातना कैंप से छूटकर बाहर आते हैं। मैं इस गीत से जुड़े सभी कलाकारों को भयंकर वाली बधाई देता हूँ ऐसा भयावह गीत लिखने, बनाने और गाने के लिए।
मैंने आज तो दिल कड़ा करके इसकी व्याख्या कर दी है पर अब मेरे शरीर में ख़ून की कमी महसूस हो रही है, ऐसे कालजयी गीत का तेज संभालने में मेरा शरीर अक्षम है इसलिए आज के युग के गीत की समीक्षा करने की हिम्मत कम ही होगी। इस गीत में गोता लगाने के बाद एक मन तो कहता है मैं संगीत से सन्यास ले लूँ, पर फिर सोचता हूँ आपका क्या होगा? इसलिए वो बप्पी दा के मासूम गीत ही बेहतर।
क्या कहा? गीत के गीतकार संगीतकार वगैरह? अरे छोड़िए, इस तरह के गीत ऊपर से उतरते हैं, इंसान की औकात नहीं ऐसी रचनाओं को रच सके, ये आमद होती है।
नोट: ये गीत Pankaj जी ने सुझाया था तभी पहली बार सुना। अगर इस भयानक एडवेंचर में मेरी जान चली जाती तो जिम्मेदारी उन्हीं की थी।
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