आँखें दो आँखें दो
आज हम आपको बताएँगे, हम नहीं किशोर दा और एस जानकी बतलाएंगे कि शरीर में सिर्फ दो आँखें होने के कितने नुकसान हैं और क्यों भगवान को अब इंसान के डिज़ाइन को अपग्रेड करना चाहिए।
इस ज्ञानवर्धक, दार्शनिक और गंभीर गीत को जितेंद्र और श्रीदेवी नाच-नाच कर गाते हैं जो इस बात का प्रतीक है कि इंसान को हर हाल में ख़ुश रहना चाहिए। अपनी कमियों की बात भी करनी है तो खुशी-खुशी करनी चाहिए, ये नहीं कि हर बात पर रोने बैठ जाएँ। इस गीत में वे बार-बार एक ही कमी का रोना रो रहे हैं, नहीं मेरा मतलब रोना हँस रहे हैं। श्रीदेवी शरीर पर फैविकोल से गुलाबी रंग की ड्रेस चिपका कर आई हैं और जितेंद्र उन्हें देख कर कहते हैं –
“रूप देखूँ रंग देखूँ, कौन सा मैं अंग देखूँ
ओ मेरे यार, ओ मेरे प्यार, तुझमें अदाएँ हज़ार”
मुझे समझ नहीं आई बात, जब रूप देखेगा तो रंग तो उसके साथ ही दिख जाएगा, पर कुछ लोग होते हैं confused, पर ना ना, ये आदमी भोला नहीं है। असली बात तो अब बोलता है कि “कौन सा मैं अंग देखूँ”
ये इस दुविधा में पड़ा है कि जब लड़की देखें तो कौन सा अंग देखना चाहिए, हालाँकि हम जब भी किसी को देखते हैं तो उसका चेहरा ही देखते हैं। या फिर शातिर है और फौरन बात बदल कर अंगों से अदाओं पर आ जाता है।
इसके बाद अचानक इसे अजीब सा दौरा पड़ जाता है और ये बार बार रटने लगता है -
“आँखें दो, आँखें दो, आँखें दो, आँखें दो
क्या करूँ क्या करूँ क्या करूँ”
अरे भई हमारी भी दो ही हैं, कोई गोटियाँ थोड़ी हैं कि इसके पास 2 हैं उसके पास 10 हैं। जितेंद्र का रोना हुआ ही है और श्रीदेवी भी इसी बात पर रोने लगती है
“आँखें दो, आँखें दो...”
राम मिलाई जोड़ी, एक अंधा एक कोढ़ी।
एक ही अंतरा बताऊंगा आपको, दूसरा खुद सुनना पड़ेगा। तो जितेंद्र उवाच –
“सोलह कलाएं बेबी तेरे अंदर, सुंदरता से भी तू सुंदर”
तो श्रीदेवी उवाच –
“सच मानूँगी तभी तेरी बातें, गुजरेंगी जब तेरे संग रातें”
जितेंद्र बेहोश। जहाँ वो इधर-उधर की बातें करके पहुँचना चाह रहा था लड़की कूद के पहुँच गई। फिर घबराहट में वो
ऊटपटाँग बातें करने लगता है –
“तू मेरे नैनों की ज़िंदगानी, तेरे बिना जीना बेमानी”
लड़की समझ जाती है कि फ्यूज़ उड़ गया इसका तो वो संभालती है –
“जादू देखूँ, जलवा देखूँ, एक नज़र से क्या क्या देखूँ,
हर बात तेरी दिल थाम”
और फिर वही शिकायत – “आँखें दो, आँखें दो, आँखें दो, आँखें दो...”
मेरा मन किया अपनी आँखें दे ही दूँ इन्हें।
इस गाने में जितेंद्र और श्रीदेवी के पीछे झाड़ियों में खड़े होकर किशोर कुमार और एस जानकी ने ये गाना गाया है। दूसरी झाड़ियों के पीछे से बप्पी दा ने बाजे बजवाये हैं और इसको लिख कर दिया था 80 के दशक के महान गीतकार इंदीवर जी ने। इसे “धरम अधिकारी” नाम की फ़िलम में डाला गया था जिसमें दिलीप कुमार भी इन दोनों की हरकतों पर शर्मिंदा थे।
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