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अंग से अंग लगाना

आँखें दो आँखें दो

चोली तेरे तन पर कसी कसी

तेरे जैसी कोई सिरिमती चाहिए

इश्क़ की दुकान चालू है

मेरे कन्ने चक्कू है

मने सोते दिया जगाय

अंगूर का दाना

किस्सिक - झंडुत्व का सिरमौर

लड़की देखी मुँह से सीटी

झ झ झ झ झोपड़ी में च च च च चारपाई

एक आँख मारूँ तो

खेतों में तू आई नहीं

तेरे बाप के डर से

प्यार चाहिए कितनी बार?

ना उन्नीस से कम हो न इक्कीस से ज़्यादा

मुझको फँसा ले या फँस जा

शादी बिना जो कंवारी, इसमें करे सवारी

बारह महीने लाइन मारी

ए हिश टाँय टाँय फिश